बड़ी ख़बर: क्या नार्थ-कोरिया से बातचीत के लिए इंडिया से मदद मांगने वाला है अमेरिका? यहाँ जाने पूरी ख़बर…

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North Korea से संबंधों के चलते कम्युनिकेशन का जरिया बन सकता है भारत: US

अमेरिका ने कहा है कि नॉर्थ कोरिया से भारत के डिप्लोमैटिक रिश्ते हैं, लिहाजा भारत उससे कम्युनिकेशन का जरिया बन सकता है। यूएस के विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन का ये बयान वॉशिंगटन और प्योंगयांग के बीच जारी तनाव के मद्देनजर सामने आया है। बता दें कि नॉर्थ कोरिया के कई न्यूक्लियर मिसाइल टेस्ट के चलते अमेरिका, जापान और साउथ कोरिया से उसके संबंध काफी बिगड़ गए हैं और जंग के हालात पैदा हो गए हैं। हालांकि टिलरसन के इस बयान से अब इस मसले को लेकर यूएस के बर्ताव में नरमी के संकेत मिले हैं।

A top American commander feels that India can play a role in defusing the North Korean crisis by helping the leadership in Pyongyang to understand the seriousness of the threat posed by its nuclear programme.

 

– न्यूज एजेंसी के मुताबिक भारत ने अमेरिका को बताया है कि नई दिल्ली का नॉर्थ कोरिया के साथ कुछ व्यापार है और इसलिए प्योंगयांग में एक छोटी भारतीय एम्बेसी है। भारत ने कहा है कि ये एम्बेसी वह बरकरार रखना चाहता है इसलिए वह चाहता है कि नॉर्थ कोरिया के साथ बातचीत के कुछ रास्ते खुले रखें जाएं।

– बता दें कि टिलरसन भारत दौरे पर आए थे और भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के साथ 25 अक्टूबर को बातचीत में ये मुद्दा भी उठा था।

भारतीय एम्बेसी बन सकती है जरिया:

– भारत द्वारा प्योंगयांग में एम्बेसी बंद करने से इनकार के सवाल पर टिलरसन ने जेनेवा में एक इंटरव्यू में कहा, “मेरा मानना है कि नई दिल्ली सिर्फ यह संकेत देना चाहता है कि उसका ऑफिस कम्युनिकेशन का जरिया बन सकता है।” टिलरसन से जब यह पूछा गया कि क्या वह भारत के एसेसमेंट से सहमत हैं तो इस पर उन्होंने कहा, “ऐसा हो सकता है, ये संभव है।”

भारत-नॉर्थ कोरिया के बीच ट्रेड:

– ऑफिशियल डाटा के मुताबिक भारत और नॉर्थ कोरिया के बीच 2016-17 में 130 मिलियन डॉलर का व्यापार हुआ था, लेकिन मौजूदा फिस्कल ईयर में यह 10.95 मिलियन डॉलर का रह गया है। भारत ने खाने और दवाओं को छोड़कर अप्रैल से नॉर्थ कोरिया से अपने सभी व्यापार पर रोक लगा रखी है। ये रोक यूएन की उस पर पाबंदी के मद्देनजर लगाई गई है।

अमेरिका को नए रास्तों की तलाश:

– टिलरसन ने कहा, “यूएस अपने सहयोगी भारत और एशिया के बाकी देशों के साथ मिलकर नए रास्तों की तलाश करना चाहता है। मेरी पीएम मोदी (नरेंद्र मोदी), स्वराज और नेशनल सिक्युरिटी एडवाइजर अजीत डोभाल के साथ इकोनॉमिक और सिक्युरिटी लिंक्स को लेकर बहुत अहम बातें हुईं। यह जरूरी है कि दोनों लोकतांत्रिक देश अपने लोगों के सामने मौजूद चुनौतियों का मिलकर मुकाबला करें।”

ट्रम्प के तीखे बयान:

– यूएस प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रम्प ने 26 सितंबर को यूनाइटेड नेशन्स की जनरल असेंबली में स्पीच दी थी। तब उन्होंने कहा था, “नॉर्थ कोरिया को 20 साल पहले, 15 साल पहले, 10 साल पहले और पांच साल पहले ही निपटा दिया जाना चाहिए था। तब उससे ज्यादा आसानी से निपटा जा सकता था।”

– “अगर किम जोंग उन परमाणु शक्ति संपन्न पड़ोसियों को डराएगा तो अमेरिका नॉर्थ कोरिया को तबाह कर सकता है। अमेरिका बेहद शक्तिशाली और सहनशील है। लेकिन अगर हमें खुद को या अपने साथियों को बचाने की जरूरत पड़ी तो हमारे सामने नॉर्थ कोरिया को तबाह करने के अलावा कोई चारा नहीं बचेगा।”

– “इस धरती के किसी भी देश की दिलचस्पी अपराधियों के इस गिरोह में नहीं है, जिसने खुद को न्यूक्लियर हथियारों और मिसाइलों से लैस कर लिया है। ये देश सुसाइड मिशन पर है। हम उसे तबाह कर सकते हैं।”

Admiral Harry Harris, commander of the US Pacific Command, says it is for India to decide on what kind of role it wants to play.

“I think India’s voice is a loud voice, that people pay attention to. So, I think that India could help North Korea, perhaps, understand the seriousness by which the United States views that threat,” Harris says.

दुनिया इसलिए नाराज है North Korea से:

– नॉर्थ कोरिया 2006, 2009, 2013 और 2016 में न्यूक्लियर बम की टेस्टिंग कर चुका है।

– 9 अक्टूबर 2006: पहली बार जमीन के अंदर किया न्यूक्लियर टेस्ट। यूएस से एटमी वॉर का बताया था खतरा।

– 25 मई 2009: दूसरी बार किया एटमी टेस्ट।

– 13 जून 2009: नॉर्थ कोरिया ने कहा कि वो यूरेनियम एनरिचमेंट करेगा। इसे न्यूक्लियर वेपन्स और प्लूटोनियम बेस्ड रिएक्टर बनाने की संभावना माना गया।

– 11 मई 2010: न्यूक्लियर फ्यूजन रिएक्टर बनाने का दावा किया। आशंका जताई गई कि नॉर्थ ज्यादा पावरफुल बम बनाएगा।

– 13 फरवरी 2013: तीसरी बार न्यूक्लियर टेस्ट किया।

– 10 दिसंबर 2015: तानाशाह उन का दावा- हासिल की हाइड्रोजन बम टेस्ट की कैपिबिलिटी।

– 6 जनवरी 2016: हाइड्रोजन बम का टेस्ट किया।

– सितंबर 2016: पांचवां एटमी टेस्ट किया।

– 3 सितंबर 2017:छठा एटमी टेस्ट किया। ये हाइड्रोजन बम था।

Tensions have risen since North Korea tested two intercontinental ballistic missiles in July.

India along with the international community condemned the North Korean missile tests and has been implementing the sanctions imposed against it by the US. Early this year, India suspended its trade links with North Korea, a move which was praised by the Trump administration.

source- https://www.bhaskar.com/

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